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How big is heaven than earth? स्वर्ग पृथ्वी से कितना बड़ा है?

 

How big is heaven than earth?

स्वर्ग का वर्णन सभी धर्मों में किया गया है लेकिन उसके क्षेत्रफल का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता, सभी धर्मों में स्वर्ग का वर्णन इस प्रकार है-

हिंदू धर्म का स्वर्ग — ऋग्वेद में कहा गया है कि तीसरे आसमान पर स्वर्ग स्थित है जहां हजारों मधु की नहरें बहती हैं। अथर्ववेद में भी शहद, घी, दूध, मदिरा से भरी नहरों का उल्लेख किया गया है। इन नहर या नदियों में बहने वाले पदार्थो का सेवन कोई भी कर सकता है और इसके लिए किसी की अनुमति नहीं लेनी पड़ती। अनुशासन पर्व में लिखा है कि स्वर्ग में शोक, रोग, बुढ़ापा और भय नहीं रहता, बहुत से अलौकिक प्राणी वहां निवास करते हैं। स्वर्ग में रहने वाली अप्सराएं जीवन भर पुण्य कर्म करने वालों को पति बनाने के लिए उतावली रहती हैं।

स्वर्ग की राजधानी अमरावती है, राजा इंद्र, सेनापति कार्तिकेय और वहां के बगीचे का नाम है नंदनवन।

ईसाई धर्म का पैराडाइज —

जो व्यक्ति जीसस में विश्वास रखता है वो वह जीसस के साथ ही सशरीर पैराडाइज में पहुंचता है। यहां दिव्य आकाश है और फूल फलों से भरे उपवन है। यहां एंजेल यानी परियां व्यक्ति की सेवा करेंगी और उसकी इच्छाएं पूरी करेंगी। यहां के प्राणी चिरयुवा रहकर सुखों का उपभोग करते हैं।

इस्लाम में जन्नत —

कुरान में जिक्र है कि कलमा पढ़ने वाले, अल्लाह को मानने वाले, जकात देने वाले और अपने पैसे पर हज करने वाले शख्स कयामत के दिन जन्नत के हकदार रहेंगे। जन्नत में शहद की नहरें, फलों से भरे बाग बगीचे, हसीन वादियां और खूबसूरत हूरें मिलेंगी। हमउम्र ये हूरें हमेशा एक जैसी रहेंगी। इनका चेहरा और बदन इतना चमकदार होगा कि सत्तर जोड़ों में भी शीशे की मानिंद चमकेगा। जन्नत में शख्स हमेशा जवान बना रहेगा और उसे कोई रंजो गम, क्लेश नहीं होगा। रूहानी फरिश्ते उसकी खिदमत में हमेशा हाजिर रहेंगे और अल्लाह का साया उस पर हमेशा बना रहेगा।

पारसी धर्म में गरोदेमान —

सत्कर्म करने वाले सभी मनुष्य जीवन के अंत जब एक पुल से गुजरेंगे तो वो गरोदेमान की राह पर पहुंचेंगे जहां फरिश्ते उन्हें गरोदेमान ले जाएंगे। गरोदेमान को एक नया संसार बताया गया है जहां किसी भी चीज की कमी नहीं होगा। हर सत्कर्म का सौ गुणा फल भोगने वाले गरोदेमान के निवासी अनन्त काल तक इन सुख सुविधाओं को भोगते रहेंगे।

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